Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.222.28-29h: जब अत्रि ने प्रजा उत्पन्न करने की इच्छा की, तब उन्होंने उन अग्नियों को अपने हृदय में धारण किया। तब उन ब्रह्मर्षि के शरीर से अनेक अग्नियाँ प्रकट हुईं।   |   mahabharat अध्याय 3.222: सह नामक अग्निका जलमें प्रवेश और अथर्वा अंगिराद्वारा पुन: उनका प्राकटॺ   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 222: सह नामक अग्निका जलमें प्रवेश और अथर्वा अंगिराद्वारा पुन: उनका प्राकटॺ  »  श्लोक 28-29h
 
 
श्लोक  3.222.28-29h 
अत्रि: पुत्रान् स्रष्टुकामस्तानेवात्मन्यधारयत्॥ २८॥
तस्य तद्‍ब्रह्मण: कार्यान्निर्हरन्ति हुताशना:।
 
 
अनुवाद
जब अत्रि ने प्रजा उत्पन्न करने की इच्छा की, तब उन्होंने उन अग्नियों को अपने हृदय में धारण किया। तब उन ब्रह्मर्षि के शरीर से अनेक अग्नियाँ प्रकट हुईं।
 
When Atri desired to create people, he held those fires in his heart. Then various fires emerged from the body of that Brahmarshi. 28 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)