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mahabharat 3.222.21: उस समुद्र में नाना स्थानों में विचरण करते हुए सहा अग्नि ने इसी प्रकार अनेक प्रकार के अग्निदेवों की रचना की और उनके स्थानों का वर्णन वेदों में किया है। 21॥   |   mahabharat अध्याय 3.222: सह नामक अग्निका जलमें प्रवेश और अथर्वा अंगिराद्वारा पुन: उनका प्राकटॺ   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 222: सह नामक अग्निका जलमें प्रवेश और अथर्वा अंगिराद्वारा पुन: उनका प्राकटॺ  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  3.222.21 
एवं त्वजनयद् धिष्ण्यान् वेदोक्तान् विबुधान् बहून्।
विचरन् विविधान् देशान् भ्रममाणस्तु तत्र वै॥ २१॥
 
 
अनुवाद
उस समुद्र में नाना स्थानों में विचरण करते हुए सहा अग्नि ने इसी प्रकार अनेक प्रकार के अग्निदेवों की रचना की और उनके स्थानों का वर्णन वेदों में किया है। 21॥
 
Wandering and roaming in various places within that ocean, Saha Agni similarly created many different types of fire gods and their places mentioned in the Vedas. 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)