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mahabharat 3.222.16: राजन! सह अग्नि के शरीर से नाना प्रकार की अन्य धातुएँ उत्पन्न हुईं। इस प्रकार वे शरीर त्यागकर घोर तपस्या में लग गए। 16॥   |   mahabharat अध्याय 3.222: सह नामक अग्निका जलमें प्रवेश और अथर्वा अंगिराद्वारा पुन: उनका प्राकटॺ   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 222: सह नामक अग्निका जलमें प्रवेश और अथर्वा अंगिराद्वारा पुन: उनका प्राकटॺ  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.222.16 
शरीराद् विविधाश्चान्ये धातवोऽस्याभवन्नृप।
एवं त्यक्त्वा शरीरं च परमे तपसि स्थित:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
राजन! सह अग्नि के शरीर से नाना प्रकार की अन्य धातुएँ उत्पन्न हुईं। इस प्रकार वे शरीर त्यागकर घोर तपस्या में लग गए। 16॥
 
Rajan! Various other types of metals were produced from the body of Saha Agni. In this way, leaving his body, he engaged in severe penance. 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)