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mahabharat 3.222.15: और उसका कलेजा काले लोहे के समान दिखाई दे रहा था। लकड़ी, पत्थर और लोहा - ये तीन वस्तुएँ लोगों की शोभा बढ़ा रही थीं। उसके नख बादलों के समान दिखाई दे रहे थे। उसकी शिराएँ मूंगे के समान दिखाई दे रही थीं॥15॥   |   mahabharat अध्याय 3.222: सह नामक अग्निका जलमें प्रवेश और अथर्वा अंगिराद्वारा पुन: उनका प्राकटॺ   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 222: सह नामक अग्निका जलमें प्रवेश और अथर्वा अंगिराद्वारा पुन: उनका प्राकटॺ  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  3.222.15 
यकृत् कृष्णायसं तस्य त्रिभिरेव बभु: प्रजा:।
नखास्तस्याभ्रपटलं शिराजालानि विद्रुमम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
और उसका कलेजा काले लोहे के समान दिखाई दे रहा था। लकड़ी, पत्थर और लोहा - ये तीन वस्तुएँ लोगों की शोभा बढ़ा रही थीं। उसके नख बादलों के समान दिखाई दे रहे थे। उसकी शिराएँ मूंगे के समान दिखाई दे रही थीं॥15॥
 
And his liver itself appeared as black iron. Wood, stone and iron - these three things adorn the people. His nails take the form of clouds. His veins have appeared as corals.॥15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)