Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.222.11-12: तत्पश्चात् अग्नि ने पुनः वही बात अथर्वा से कही। उस समय देवताओं के कहने पर अथर्वा मुनि ने सह नामक अग्निदेव से प्रार्थना की; परन्तु वे न तो हविष्य का भार उठाना चाहते थे और न उनके जीर्ण-शीर्ण शरीर का भार ही सहन कर सकते थे। अन्त में उन्होंने अपना शरीर त्याग दिया। 11-12॥ | mahabharat अध्याय 3.222: सह नामक अग्निका जलमें प्रवेश और अथर्वा अंगिराद्वारा पुन: उनका प्राकटॺ । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अथर्वाणं तथा चापि हव्यवाहोऽब्रवीद् वच:॥ ११॥
अनुनीयमानो हि भृशं देववाक्याद्धि तेन स:।
नैच्छद् वोढुं हवि: सोढुं शरीरं चापि सोऽत्यजत्॥ १२॥
अनुवाद
तत्पश्चात् अग्नि ने पुनः वही बात अथर्वा से कही। उस समय देवताओं के कहने पर अथर्वा मुनि ने सह नामक अग्निदेव से प्रार्थना की; परन्तु वे न तो हविष्य का भार उठाना चाहते थे और न उनके जीर्ण-शीर्ण शरीर का भार ही सहन कर सकते थे। अन्त में उन्होंने अपना शरीर त्याग दिया। 11-12॥
Thereafter Agni again said the same thing to Atharva. At that time, at the behest of the gods, Atharva Muni pleaded with the fire god named Saha; But he neither wanted to take the burden of carrying the future nor could he bear the weight of his dilapidated body. Ultimately he left his body. 11-12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥