श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 221: अग्निस्वरूप तप और भानु (मनु)-की संततिका वर्णन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.221.8 
तपसश्च मनुं पुत्रं भानुं चाप्यङ्गिरा: सृजत्।
बृहद्भानुं तु तं प्राहुर्ब्राह्मणा वेदपारगा:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
मनु (प्रजापति) के पुत्र भानु नामक अग्नि को भी आपने अपने तप के प्रभाव से आलिंगन करके (अपने प्रभाव से अर्पण करके) नवजीवन प्रदान किया है। वेदों के प्रकाण्ड विद्वान ब्राह्मण भानु को 'बृहद्भानु' कहते हैं। 8॥
 
By embracing the fire named Bhanu, the son of Manu (Prajapati) in the form of your penance (by offering his influence), he has also given a new life. The Brahmin Bhanu, an eminent scholar of the Vedas, is called 'Brihadbhanu'. 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)