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mahabharat 3.221.5: वेदों के पारंगत ब्राह्मण 'शम्भु' और 'अवस्थ्य' नामक अग्नियों को देदीप्यमान और महान तेज से युक्त बताते हैं॥5॥   |   mahabharat अध्याय 3.221: अग्निस्वरूप तप और भानु (मनु)-की संततिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 221: अग्निस्वरूप तप और भानु (मनु)-की संततिका वर्णन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  3.221.5 
शम्भुमग्निमथ प्राहुर्ब्राह्मणा वेदपारगा:।
आवसथ्यं द्विजा: प्राहुर्दीप्तमग्निं महाप्रभम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
वेदों के पारंगत ब्राह्मण 'शम्भु' और 'अवस्थ्य' नामक अग्नियों को देदीप्यमान और महान तेज से युक्त बताते हैं॥5॥
 
The well-versed Brahmins of the Vedas describe the fires named 'Shambhu' and 'Avasthya' as resplendent and full of great radiance. 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)