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mahabharat 3.221.31: जब सूतिकागृह की अग्नि अग्निहोत्र की अग्नि को स्पर्श कर ले, तब आठ मिट्टी के बर्तनों में संस्कृत पुरोडाश द्वारा 'अग्निमान्' नामक अग्नि में आहुति देनी चाहिए। 31॥   |   mahabharat अध्याय 3.221: अग्निस्वरूप तप और भानु (मनु)-की संततिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 221: अग्निस्वरूप तप और भानु (मनु)-की संततिका वर्णन  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  3.221.31 
सूतिकाग्निर्यदा चाग्निं संस्पृशेदग्निहोत्रिकम्।
इष्टिरष्टाकपालेन कार्या चाग्निमतेऽग्नये॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
जब सूतिकागृह की अग्नि अग्निहोत्र की अग्नि को स्पर्श कर ले, तब आठ मिट्टी के बर्तनों में संस्कृत पुरोडाश द्वारा 'अग्निमान्' नामक अग्नि में आहुति देनी चाहिए। 31॥
 
When the fire of Sutikagriha touches the fire of Agnihotra, then sacrifice should be made to the fire called 'Agniman' by Sanskrit Purodash in eight earthen pots. 31॥
 
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि मार्कण्डेयसमास्यापर्वणि आंगिरसोपाख्याने एकविंशत्यधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २२१॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत मार्कण्डेयसमास्यापर्वमें आंगिरसोपाख्यानविषयक

दो सौ इक्‍कीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २२१॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)