Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.221.30: जिसका दर्श और पूर्णिमा का यज्ञ आरंभ हो गया हो या उसमें आहुति न दी गई हो, उसे 'पथिकृत' नामक अग्नि में आठ मिट्टी के बर्तनों में संस्कृत चरुका से आहुति देनी चाहिए। | mahabharat अध्याय 3.221: अग्निस्वरूप तप और भानु (मनु)-की संततिका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दर्शं च पौर्णमासं च यस्य तिष्ठेत् प्रतिष्ठितम्।
इष्टिरष्टाकपालेन कार्या पथिकृतेऽग्नये॥ ३०॥
अनुवाद
जिसका दर्श और पूर्णिमा का यज्ञ आरंभ हो गया हो या उसमें आहुति न दी गई हो, उसे 'पथिकृत' नामक अग्नि में आठ मिट्टी के बर्तनों में संस्कृत चरुका से आहुति देनी चाहिए।
One whose Darsha and Poornamas Yagya which has been started gets interrupted or remains without offering any oblations, he should perform oblations using Sanskrit Charuka in eight clay pots for the fire called 'Pathikrit'.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥