Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.221.29: जो ब्राह्मण किसी पीड़ा से व्यथित हो और तीन रातों तक अग्निहोत्र न कर सके, उसे आठ मिट्टी के बर्तनों में संस्कृत चरुका का उपयोग करके 'उत्तर' नामक अग्नि में आहुति देनी चाहिए। | mahabharat अध्याय 3.221: अग्निस्वरूप तप और भानु (मनु)-की संततिका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आर्तो न जुहुयादग्निं त्रिरात्रं यस्तु ब्राह्मण:।
इष्टिरष्टाकपालेन कार्या स्यादुत्तराग्नये॥ २९॥
अनुवाद
जो ब्राह्मण किसी पीड़ा से व्यथित हो और तीन रातों तक अग्निहोत्र न कर सके, उसे आठ मिट्टी के बर्तनों में संस्कृत चरुका का उपयोग करके 'उत्तर' नामक अग्नि में आहुति देनी चाहिए।
A Brahmin who is distressed by some pain and does not perform Agnihotra for three nights, should offer oblations to the fire called 'Uttar' using a Sanskrit Charuka in eight clay pots.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥