Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.221.19: जो प्राणियों की आत्माओं को आश्रय लेकर उनके शरीरों को कार्य में लगाता है, उसे 'सम्पूर्ण' अग्नि कहते हैं। वह मनु का तीसरा पुत्र है। वह शब्द और रूप को समझने में सहायता करता है।॥19॥ | mahabharat अध्याय 3.221: अग्निस्वरूप तप और भानु (मनु)-की संततिका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्राणानाश्रित्य यो देहं प्रवर्तयति देहिनाम्।
तस्य संनिहितो नाम शब्दरूपस्य साधन:॥ १९॥
अनुवाद
जो प्राणियों की आत्माओं को आश्रय लेकर उनके शरीरों को कार्य में लगाता है, उसे 'सम्पूर्ण' अग्नि कहते हैं। वह मनु का तीसरा पुत्र है। वह शब्द और रूप को समझने में सहायता करता है।॥19॥
The one who takes shelter of the souls of the living beings and makes their bodies work is called 'Samnihit' Agni. He is the third son of Manu. He helps in understanding sound and form.॥19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥