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mahabharat 3.221.16: चातुर्मास्य यज्ञों में हविष्यद्वार पर्जन्य के साथ जिनकी पूजा की जाती है, उनमें से मुख्य अग्नि (मनु के प्रथम पुत्र) हैं, जिनका नाम कांतिमान् वैश्वानर है ॥16॥   |   mahabharat अध्याय 3.221: अग्निस्वरूप तप और भानु (मनु)-की संततिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 221: अग्निस्वरूप तप और भानु (मनु)-की संततिका वर्णन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.221.16 
पूज्यते हविषाग्रॺेण चातुर्मास्येषु पावक:।
पर्जन्यसहित: श्रीमानग्निर्वैश्वानरस्तु स:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
चातुर्मास्य यज्ञों में हविष्यद्वार पर्जन्य के साथ जिनकी पूजा की जाती है, उनमें से मुख्य अग्नि (मनु के प्रथम पुत्र) हैं, जिनका नाम कांतिमान् वैश्वानर है ॥16॥
 
In the Chaturmasya yagyas, the main one who is worshiped along with Havishyadwara Parjanya is Agni (first son of Manu) named Kantiman Vaishwanar. 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)