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mahabharat 3.221.14: चातुर्मास्य यज्ञों में प्रतिदिन निर्धारित अग्नि आदि आठ आहुतियों के उद्गम स्थान का नाम 'अग्रह' है। (यह वैश्वदेव पर्व में विश्वदेव नामक प्रधान अग्नि हैं - ये भानु के पाँचवें पुत्र हैं) 'स्तुभ' नामक अग्नि भी भानु के पुत्र हैं। पूर्वोक्त चार पुत्रों, अर्थात् अग्रह (वैश्वदेव) और स्तुभ के साथ भानु के छः पुत्र हैं। 14॥   |   mahabharat अध्याय 3.221: अग्निस्वरूप तप और भानु (मनु)-की संततिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 221: अग्निस्वरूप तप और भानु (मनु)-की संततिका वर्णन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.221.14 
चातुर्मास्येषु नित्यानां हविषां योनिरग्रह:।
चतुर्भि: सहित: पुत्रैर्भानोरेवान्वय: स्तुभ:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
चातुर्मास्य यज्ञों में प्रतिदिन निर्धारित अग्नि आदि आठ आहुतियों के उद्गम स्थान का नाम 'अग्रह' है। (यह वैश्वदेव पर्व में विश्वदेव नामक प्रधान अग्नि हैं - ये भानु के पाँचवें पुत्र हैं) 'स्तुभ' नामक अग्नि भी भानु के पुत्र हैं। पूर्वोक्त चार पुत्रों, अर्थात् अग्रह (वैश्वदेव) और स्तुभ के साथ भानु के छः पुत्र हैं। 14॥
 
The name of the place of origin of the eight oblations like fire and fire prescribed daily in the Chaturmasya yagyas is 'Agraha'. (He is the chief fire named Vishwadev in the Vaishwadev festival – he is the fifth son of Bhanu) Agni named ‘Stubha’ is also the son of Bhanu. Along with the four sons mentioned earlier, which are Agraha (Vaishvadev) and Stubha, Bhanu has six sons. 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)