Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.220.1: मार्कण्डेयजी कहते हैं- युधिष्ठिर! कश्यप के पुत्र कश्यप, वसिष्ठ के पुत्र वसिष्ठ, प्राण के पुत्र प्राणक, अंगिरा के पुत्र च्यवन और त्रिवर्च - ये पाँच अग्नि हैं। 1॥ | mahabharat अध्याय 3.220: पाञ्चजन्य अग्निकी उत्पत्ति तथा उसकी संततिका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मार्कण्डेयजी कहते हैं- युधिष्ठिर! कश्यप के पुत्र कश्यप, वसिष्ठ के पुत्र वसिष्ठ, प्राण के पुत्र प्राणक, अंगिरा के पुत्र च्यवन और त्रिवर्च - ये पाँच अग्नि हैं। 1॥
Markandeyaji says- Yudhishthir! Kashyapa's son Kashyap, Vasistha's son Vasistha, Pran's son Pranak, Angira's son Chyavana and Trivarcha - these are the five fires. 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥