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mahabharat 3.22.9: तदनन्तर वह सौभविमान अपनी इच्छानुसार गति करता हुआ पुनः प्राग्ज्योतिषपुर के निकट मेरे नेत्रों को भ्रमित करता हुआ प्रकट हुआ॥9॥   |   mahabharat अध्याय 3.22: शाल्ववधोपाख्यानकी समाप्ति और युधिष्ठिरकी आज्ञा लेकर श्रीकृष्ण, धृष्टद्युम्न तथा अन्य सब राजाओंका अपने-अपने नगरको प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 22: शाल्ववधोपाख्यानकी समाप्ति और युधिष्ठिरकी आज्ञा लेकर श्रीकृष्ण, धृष्टद्युम्न तथा अन्य सब राजाओंका अपने-अपने नगरको प्रस्थान  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.22.9 
तत: प्राग्ज्योतिषं गत्वा पुनरेव व्यदृश्यत।
सौभं कामगमं वीर मोहयन्मम चक्षुषी॥ ९॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर वह सौभविमान अपनी इच्छानुसार गति करता हुआ पुनः प्राग्ज्योतिषपुर के निकट मेरे नेत्रों को भ्रमित करता हुआ प्रकट हुआ॥9॥
 
Thereafter, the Saubhaviman, moving as per his wish, again appeared near Pragjyotishpur, confusing my eyes. 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)