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mahabharat 3.22.8: हे भारत! इस प्रकार उन राक्षसों ने दसों दिशाओं में इधर-उधर उत्पात मचाया और मेरे ही हाथों मारे गये।   |   mahabharat अध्याय 3.22: शाल्ववधोपाख्यानकी समाप्ति और युधिष्ठिरकी आज्ञा लेकर श्रीकृष्ण, धृष्टद्युम्न तथा अन्य सब राजाओंका अपने-अपने नगरको प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 22: शाल्ववधोपाख्यानकी समाप्ति और युधिष्ठिरकी आज्ञा लेकर श्रीकृष्ण, धृष्टद्युम्न तथा अन्य सब राजाओंका अपने-अपने नगरको प्रस्थान  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.22.8 
एवं दश दिश: सर्वास्तिर्यगूर्ध्वं च भारत।
नादयामासुरसुरास्ते चापि निहता मया॥ ८॥
 
 
अनुवाद
हे भारत! इस प्रकार उन राक्षसों ने दसों दिशाओं में इधर-उधर उत्पात मचाया और मेरे ही हाथों मारे गये।
 
Bhaarat! In this way those demons created a ruckus here and there, up and down, in all the ten directions, and were killed by my hands.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)