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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 22: शाल्ववधोपाख्यानकी समाप्ति और युधिष्ठिरकी आज्ञा लेकर श्रीकृष्ण, धृष्टद्युम्न तथा अन्य सब राजाओंका अपने-अपने नगरको प्रस्थान  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.22.7 
तस्मिन्नुपरते शब्दे पुनरेवान्यतोऽभवत्।
शब्दोऽपरो महाराज तत्रापि प्राहरं शरै:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
महाराज! जब शोर कम हुआ, तो दूसरी ओर से उनकी आवाज़ें सुनाई दीं। तब मैंने वहाँ भी बाण चलाए।
 
Maharaj! When the noise subsided, their voices were heard from the other side. Then I shot arrows there too.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)