श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 22: शाल्ववधोपाख्यानकी समाप्ति और युधिष्ठिरकी आज्ञा लेकर श्रीकृष्ण, धृष्टद्युम्न तथा अन्य सब राजाओंका अपने-अपने नगरको प्रस्थान  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  3.22.54 
युधिष्ठिरस्तु विप्रांस्ताननुमान्य महामना:।
शशास पुरुषान् काले रथान् योजयतेति वै॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् महामनस्वी युधिष्ठिर ने समस्त ब्राह्मणों की अनुमति लेकर अपने सेवकों को समयानुकूल आदेश दिया - 'रथों को जोतकर तैयार करो।' 54.
 
Thereafter the great-minded Yudhishthira, with the permission of all the Brahmins, gave the timely order to his servants - 'Harness the chariots and make them ready.' 54.
 
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि अर्जुनाभिगमनपर्वणि सौभवधोपाख्याने द्वाविंशोऽध्याय:॥ २२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत अर्जुनाभिगमनपर्वमें सौभवधोपाख्यानविषयक बाईसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २२॥

 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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