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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 22: शाल्ववधोपाख्यानकी समाप्ति और युधिष्ठिरकी आज्ञा लेकर श्रीकृष्ण, धृष्टद्युम्न तथा अन्य सब राजाओंका अपने-अपने नगरको प्रस्थान  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  3.22.51 
केकयाश्चाप्यनुज्ञाता: कौन्तेयेनामितौजसा।
आमन्त्र्य पाण्डवान् सर्वान् प्रययुस्तेऽपि भारत॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
हे भारत! कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर की आज्ञा पाकर केकयराज युधिष्ठिर समस्त पाण्डवों से विदा लेकर अपने नगर को चले गये।
 
Bhaarat! On receiving the orders of the illustrious son of Kunti, Yudhishthira, the prince of Kekaya, took leave from all the Pandavas and went to his city.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)