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mahabharat 3.22.50: चेदिराज धृष्टकेतु अपनी बहिन करेणुमति के साथ, जो नकुल की पत्नी थी, पाण्डवों से मिलकर अपनी सुन्दर राजधानी शुक्तिमतिपुरी को चले गये ॥ 50॥   |   mahabharat अध्याय 3.22: शाल्ववधोपाख्यानकी समाप्ति और युधिष्ठिरकी आज्ञा लेकर श्रीकृष्ण, धृष्टद्युम्न तथा अन्य सब राजाओंका अपने-अपने नगरको प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 22: शाल्ववधोपाख्यानकी समाप्ति और युधिष्ठिरकी आज्ञा लेकर श्रीकृष्ण, धृष्टद्युम्न तथा अन्य सब राजाओंका अपने-अपने नगरको प्रस्थान  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  3.22.50 
धृष्टकेतु: स्वसारं च समादायाथ चेदिराट्।
जगाम पाण्डवान् दृष्ट्वा रम्यां शुक्तिमतीं पुरीम्॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
चेदिराज धृष्टकेतु अपनी बहिन करेणुमति के साथ, जो नकुल की पत्नी थी, पाण्डवों से मिलकर अपनी सुन्दर राजधानी शुक्तिमतिपुरी को चले गये ॥ 50॥
 
King of Chedi, Dhrishtaketu, along with his sister Karenumati, who was the wife of Nakula, after meeting the Pandavas, went to his beautiful capital, Suktimathipuri. ॥ 50॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)