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mahabharat 3.22.48: वह रथ शैब्य और सुग्रीव नामक घोड़ों द्वारा खींचा जा रहा था और सूर्य के समान तेजस्वी था। युधिष्ठिर को आश्वासन देकर श्रीकृष्ण उसी रथ पर सवार होकर द्वारकापुरी के लिए प्रस्थान कर गए।   |   mahabharat अध्याय 3.22: शाल्ववधोपाख्यानकी समाप्ति और युधिष्ठिरकी आज्ञा लेकर श्रीकृष्ण, धृष्टद्युम्न तथा अन्य सब राजाओंका अपने-अपने नगरको प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 22: शाल्ववधोपाख्यानकी समाप्ति और युधिष्ठिरकी आज्ञा लेकर श्रीकृष्ण, धृष्टद्युम्न तथा अन्य सब राजाओंका अपने-अपने नगरको प्रस्थान  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  3.22.48 
शैब्यसुग्रीवयुक्तेन रथेनादित्यवर्चसा।
द्वारकां प्रययौ कृष्ण: समाश्वास्य युधिष्ठिरम्॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
वह रथ शैब्य और सुग्रीव नामक घोड़ों द्वारा खींचा जा रहा था और सूर्य के समान तेजस्वी था। युधिष्ठिर को आश्वासन देकर श्रीकृष्ण उसी रथ पर सवार होकर द्वारकापुरी के लिए प्रस्थान कर गए।
 
That chariot was drawn by horses named Shaibya and Sugreeva and appeared as radiant as the Sun. After assuring Yudhishthira, Shri Krishna left for Dwarkapuri in the same chariot.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)