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mahabharat 3.22.45: महाबाहु श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को प्रणाम किया। राजा युधिष्ठिर और भीम ने बड़ी भुजाओं वाले भगवान श्रीकृष्ण का मस्तक सूँघ लिया। 45॥   |   mahabharat अध्याय 3.22: शाल्ववधोपाख्यानकी समाप्ति और युधिष्ठिरकी आज्ञा लेकर श्रीकृष्ण, धृष्टद्युम्न तथा अन्य सब राजाओंका अपने-अपने नगरको प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 22: शाल्ववधोपाख्यानकी समाप्ति और युधिष्ठिरकी आज्ञा लेकर श्रीकृष्ण, धृष्टद्युम्न तथा अन्य सब राजाओंका अपने-अपने नगरको प्रस्थान  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  3.22.45 
अभिवाद्य महाबाहुर्धर्मराजं युधिष्ठिरम्।
राज्ञा मूर्धन्युपाघ्रातो भीमेन च महाभुज:॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
महाबाहु श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को प्रणाम किया। राजा युधिष्ठिर और भीम ने बड़ी भुजाओं वाले भगवान श्रीकृष्ण का मस्तक सूँघ लिया। 45॥
 
Mighty-armed Shri Krishna bowed to Dharmaraja Yudhishthir. King Yudhishthir and Bhima smelled the head of Lord Krishna with big arms. 45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)