श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 22: शाल्ववधोपाख्यानकी समाप्ति और युधिष्ठिरकी आज्ञा लेकर श्रीकृष्ण, धृष्टद्युम्न तथा अन्य सब राजाओंका अपने-अपने नगरको प्रस्थान  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  3.22.44 
वैशम्पायन उवाच
एवमुक्त्वा महाबाहु: कौरवं पुरुषोत्तम:।
आमन्त्र्य प्रययौ श्रीमान् पाण्डवान् मधुसूदन:॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं- जनमेजय! इतना कहकर मनुष्यों में सबसे शक्तिशाली पुरुष मधुसूदन कुरुनन्दन युधिष्ठिर की आज्ञा लेकर द्वारका की ओर चल दिये। 44॥
 
Vaishampayanji says – Janamejaya! Having said this, the most powerful man among men, Madhusudan Kurunandan, took the orders of Yudhishthir and proceeded towards Dwarka. 44॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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