Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.22.42-43: राजन! यही कारण है कि मैं उन दिनों हस्तिनापुर नहीं आ सका। हे धर्मराज, शत्रु योद्धाओं का नाश करने वाले! यदि मैं आ जाता, तो या तो द्यूतक्रीड़ा होती ही नहीं, या दुर्योधन जीवित नहीं बचता। जिस प्रकार बाँध टूट जाने पर पानी को कोई नहीं रोक सकता, उसी प्रकार आज जब सब कुछ नष्ट हो गया है, तो मैं क्या कर सकता हूँ? | mahabharat अध्याय 3.22: शाल्ववधोपाख्यानकी समाप्ति और युधिष्ठिरकी आज्ञा लेकर श्रीकृष्ण, धृष्टद्युम्न तथा अन्य सब राजाओंका अपने-अपने नगरको प्रस्थान । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तदेतत् कारणं राजन् यदहं नागसाह्वयम्।
नागमं परवीरघ्न न हि जीवेत् सुयोधन:॥ ४२॥
मय्यागतेऽथवा वीर द्यूतं न भविता तथा।
अद्याहं किं करिष्यामि भिन्नसेतुरिवोदकम्॥ ४३॥
अनुवाद
राजन! यही कारण है कि मैं उन दिनों हस्तिनापुर नहीं आ सका। हे धर्मराज, शत्रु योद्धाओं का नाश करने वाले! यदि मैं आ जाता, तो या तो द्यूतक्रीड़ा होती ही नहीं, या दुर्योधन जीवित नहीं बचता। जिस प्रकार बाँध टूट जाने पर पानी को कोई नहीं रोक सकता, उसी प्रकार आज जब सब कुछ नष्ट हो गया है, तो मैं क्या कर सकता हूँ?
King! This is the reason why I could not come to Hastinapur in those days. O Dharmaraja, destroyer of enemy warriors! If I had come, either the gambling would not have taken place or Duryodhan would not have survived. Just as no one can stop the water when the dam breaks, similarly today when everything has been ruined, what can I do?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥