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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 22: शाल्ववधोपाख्यानकी समाप्ति और युधिष्ठिरकी आज्ञा लेकर श्रीकृष्ण, धृष्टद्युम्न तथा अन्य सब राजाओंका अपने-अपने नगरको प्रस्थान  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  3.22.39 
ततोऽहं समवस्थाप्य रथं सौभसमीपत:।
शङ्खं प्रध्माप्य हर्षेण सुहृद: पर्यहर्षयम्॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
फिर मैंने सौभाग्य विमान के पास अपना रथ रोक दिया और प्रसन्नतापूर्वक शंख बजाकर अपने सभी मित्रों को आनंद में डुबो दिया।
 
Then I stopped my chariot near the Saubhagya aircraft and joyfully blew my conch and immersed all my friends in joy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)