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mahabharat 3.22.38: वीर शाल्व के मारे जाने पर राक्षसों के हृदय में भय व्याप्त हो गया। मेरे बाणों से पीड़ित होकर वे हाहाकार करते हुए चारों ओर भाग गए।   |   mahabharat अध्याय 3.22: शाल्ववधोपाख्यानकी समाप्ति और युधिष्ठिरकी आज्ञा लेकर श्रीकृष्ण, धृष्टद्युम्न तथा अन्य सब राजाओंका अपने-अपने नगरको प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 22: शाल्ववधोपाख्यानकी समाप्ति और युधिष्ठिरकी आज्ञा लेकर श्रीकृष्ण, धृष्टद्युम्न तथा अन्य सब राजाओंका अपने-अपने नगरको प्रस्थान  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  3.22.38 
तस्मिन् विनिहते वीरे दानवास्त्रस्तचेतस:।
हाहाभूता दिशो जग्मुरर्दिता मम सायकै:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
वीर शाल्व के मारे जाने पर राक्षसों के हृदय में भय व्याप्त हो गया। मेरे बाणों से पीड़ित होकर वे हाहाकार करते हुए चारों ओर भाग गए।
 
When the brave Shalva was killed, fear filled the hearts of the demons. Pained by my arrows, they fled in all directions wailing.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)