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mahabharat 3.22.36: सौभाग्य विमान के गिरते ही चक्र पुनः मेरे हाथ में आ गया। मैंने उसे पुनः उठाकर बड़े जोर से घुमाया और कहा, 'इस बार मैं तुम्हें शाल्व का वध करने के लिए छोड़ रहा हूँ।' 36.   |   mahabharat अध्याय 3.22: शाल्ववधोपाख्यानकी समाप्ति और युधिष्ठिरकी आज्ञा लेकर श्रीकृष्ण, धृष्टद्युम्न तथा अन्य सब राजाओंका अपने-अपने नगरको प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 22: शाल्ववधोपाख्यानकी समाप्ति और युधिष्ठिरकी आज्ञा लेकर श्रीकृष्ण, धृष्टद्युम्न तथा अन्य सब राजाओंका अपने-अपने नगरको प्रस्थान  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  3.22.36 
तस्मिन्निपतिते सौभे चक्रमागात् करं मम।
पुनश्चादाय वेगेन शाल्वायेत्यहमब्रुवम्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
सौभाग्य विमान के गिरते ही चक्र पुनः मेरे हाथ में आ गया। मैंने उसे पुनः उठाकर बड़े जोर से घुमाया और कहा, 'इस बार मैं तुम्हें शाल्व का वध करने के लिए छोड़ रहा हूँ।' 36.
 
When the Saubhagya aircraft fell, the discus again came into my hands. I again took it and swung it with great force and said, 'This time I am leaving you to kill Shalva.' 36.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)