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mahabharat 3.22.30: इतना ही नहीं, वह यक्षों, राक्षसों, दानवों और शत्रु राजाओं का नाश करने में भी महान और समर्थ था ॥30॥   |   mahabharat अध्याय 3.22: शाल्ववधोपाख्यानकी समाप्ति और युधिष्ठिरकी आज्ञा लेकर श्रीकृष्ण, धृष्टद्युम्न तथा अन्य सब राजाओंका अपने-अपने नगरको प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 22: शाल्ववधोपाख्यानकी समाप्ति और युधिष्ठिरकी आज्ञा लेकर श्रीकृष्ण, धृष्टद्युम्न तथा अन्य सब राजाओंका अपने-अपने नगरको प्रस्थान  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  3.22.30 
यक्षाणां राक्षसानां च दानवानां च संयुगे।
राज्ञां च प्रतिलोमानां भस्मान्तकरणं महत्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
इतना ही नहीं, वह यक्षों, राक्षसों, दानवों और शत्रु राजाओं का नाश करने में भी महान और समर्थ था ॥30॥
 
Not only this, he was also great and capable of destroying Yakshas, demons, devils and enemy kings. ॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)