Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.22.24-27: 'यदि कोई शत्रु अपने घर में सिंहासन पर बैठा हो (युद्ध करना न चाहता हो), तो भी उसे नष्ट करने में चूकना नहीं चाहिए; फिर जो युद्ध करने के लिए युद्धस्थल में खड़ा हो, उसके बारे में क्या कहा जाए? इसलिए हे नरसिंह! प्रभु! आपको इस शत्रु को हर प्रकार से मार डालना चाहिए। हे वृष्णिवंशी! आपको इस कार्य में फिर विलम्ब नहीं करना चाहिए। वह कोमल उपायों से वश में नहीं होगा। वास्तव में, वह आपका मित्र भी नहीं है; क्योंकि वीर! उसने आपके साथ युद्ध करके द्वारकापुरी का नाश किया है, इसलिए उसे शीघ्र ही मार डालना चाहिए।' हे कुन्तीपुत्र! सारथि के मुख से ऐसी बातें सुनकर मैंने सोचा कि वह सत्य कह रहा है। ऐसा विचार करके मैंने शाल्वराज को मारने और सौभाग्य के विमान को मार गिराने के लिए युद्ध में अपना मन लगाया। | mahabharat अध्याय 3.22: शाल्ववधोपाख्यानकी समाप्ति और युधिष्ठिरकी आज्ञा लेकर श्रीकृष्ण, धृष्टद्युम्न तथा अन्य सब राजाओंका अपने-अपने नगरको प्रस्थान । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'यदि कोई शत्रु अपने घर में सिंहासन पर बैठा हो (युद्ध करना न चाहता हो), तो भी उसे नष्ट करने में चूकना नहीं चाहिए; फिर जो युद्ध करने के लिए युद्धस्थल में खड़ा हो, उसके बारे में क्या कहा जाए? इसलिए हे नरसिंह! प्रभु! आपको इस शत्रु को हर प्रकार से मार डालना चाहिए। हे वृष्णिवंशी! आपको इस कार्य में फिर विलम्ब नहीं करना चाहिए। वह कोमल उपायों से वश में नहीं होगा। वास्तव में, वह आपका मित्र भी नहीं है; क्योंकि वीर! उसने आपके साथ युद्ध करके द्वारकापुरी का नाश किया है, इसलिए उसे शीघ्र ही मार डालना चाहिए।' हे कुन्तीपुत्र! सारथि के मुख से ऐसी बातें सुनकर मैंने सोचा कि वह सत्य कह रहा है। ऐसा विचार करके मैंने शाल्वराज को मारने और सौभाग्य के विमान को मार गिराने के लिए युद्ध में अपना मन लगाया।
'Even if an enemy is sitting on a throne in his house (does not want to fight), one should not fail to destroy him; then what about one who is standing in the battle field to fight? Therefore, O lion of men! Lord! You should kill this enemy by all means. O descendant of Vrishni! You should not delay this task again. He will not be subdued by gentle means. In fact, he is not even your friend; because brave! He fought with you and destroyed Dwarakapuri, therefore he should be killed quickly.' O son of Kunti! Hearing such words from the charioteer's mouth, I thought that he is saying the truth. Thinking this, I focused my mind on the battle to kill Shalvaraj and kill Saubhagya's aircraft. 24-27.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥