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mahabharat 3.22.23: हे वीर शत्रुसंहारक! इस शत्रु का वध करने के लिए तुम्हें अपनी पूरी शक्ति लगा देनी चाहिए। मनुष्य चाहे कितना ही बलवान क्यों न हो, उसे अपने दुर्बल शत्रु की भी उपेक्षा नहीं करनी चाहिए।॥ 23॥   |   mahabharat अध्याय 3.22: शाल्ववधोपाख्यानकी समाप्ति और युधिष्ठिरकी आज्ञा लेकर श्रीकृष्ण, धृष्टद्युम्न तथा अन्य सब राजाओंका अपने-अपने नगरको प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 22: शाल्ववधोपाख्यानकी समाप्ति और युधिष्ठिरकी आज्ञा लेकर श्रीकृष्ण, धृष्टद्युम्न तथा अन्य सब राजाओंका अपने-अपने नगरको प्रस्थान  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  3.22.23 
सर्वै: पराक्रमैर्वीर वध्य: शत्रुरमित्रहन्।
न शत्रुरवमन्तव्यो दुर्बलोऽपि बलीयसा॥ २३॥
 
 
अनुवाद
हे वीर शत्रुसंहारक! इस शत्रु का वध करने के लिए तुम्हें अपनी पूरी शक्ति लगा देनी चाहिए। मनुष्य चाहे कितना ही बलवान क्यों न हो, उसे अपने दुर्बल शत्रु की भी उपेक्षा नहीं करनी चाहिए।॥ 23॥
 
'O brave enemy killer! You should use all your might to kill this enemy. No matter how strong a person is, he should not ignore even his weak enemy.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)