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mahabharat 3.22.21: 'वार्ष्णेय! देखो, सौभराज शाल्व वहाँ खड़ा है। श्रीकृष्ण! उसकी उपेक्षा करने से कोई लाभ नहीं है। उसे मारने का कोई उचित उपाय करो।'   |   mahabharat अध्याय 3.22: शाल्ववधोपाख्यानकी समाप्ति और युधिष्ठिरकी आज्ञा लेकर श्रीकृष्ण, धृष्टद्युम्न तथा अन्य सब राजाओंका अपने-अपने नगरको प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 22: शाल्ववधोपाख्यानकी समाप्ति और युधिष्ठिरकी आज्ञा लेकर श्रीकृष्ण, धृष्टद्युम्न तथा अन्य सब राजाओंका अपने-अपने नगरको प्रस्थान  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  3.22.21 
साधु सम्पश्य वार्ष्णेय शाल्वं सौभपतिं स्थितम्।
अलं कृष्णावमन्यैनं साधु यत्नं समाचर॥ २१॥
 
 
अनुवाद
'वार्ष्णेय! देखो, सौभराज शाल्व वहाँ खड़ा है। श्रीकृष्ण! उसकी उपेक्षा करने से कोई लाभ नहीं है। उसे मारने का कोई उचित उपाय करो।'
 
'Varshneya! Look there, Soubhraaj Shalva is standing there. Shri Krishna! There is no use in ignoring him. Find a suitable way to kill him. 21.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)