Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.22.16: शत्रु हर्षित हुए और मित्र शोक में डूबे। हे वीर युधिष्ठिर, जो अपनी मर्यादा से कभी विचलित नहीं होते! इसी प्रकार राजा शाल्व ने एक बार मुझ पर विजय प्राप्त की थी। जब मुझे होश आया, तो मैंने सारथि से यह बात सुनी। | mahabharat अध्याय 3.22: शाल्ववधोपाख्यानकी समाप्ति और युधिष्ठिरकी आज्ञा लेकर श्रीकृष्ण, धृष्टद्युम्न तथा अन्य सब राजाओंका अपने-अपने नगरको प्रस्थान । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
द्विषतां च प्रहर्षोऽभूदार्तिश्चाद्विषतामपि।
एवं विजितवान् वीर पश्चादश्रौषमच्युत॥ १६॥
अनुवाद
शत्रु हर्षित हुए और मित्र शोक में डूबे। हे वीर युधिष्ठिर, जो अपनी मर्यादा से कभी विचलित नहीं होते! इसी प्रकार राजा शाल्व ने एक बार मुझ पर विजय प्राप्त की थी। जब मुझे होश आया, तो मैंने सारथि से यह बात सुनी।
Enemies were filled with joy and friends were filled with sorrow. O brave Yudhishthira who never deviates from his limits! In this way King Shalva had once been victorious over me. After I became conscious, I heard this from the charioteer.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥