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mahabharat 3.22.13: यह देखकर मेरे सैनिक, वृष्णिवंश के श्रेष्ठ योद्धा, भय से भरकर सहसा सब दिशाओं में भाग गये।   |   mahabharat अध्याय 3.22: शाल्ववधोपाख्यानकी समाप्ति और युधिष्ठिरकी आज्ञा लेकर श्रीकृष्ण, धृष्टद्युम्न तथा अन्य सब राजाओंका अपने-अपने नगरको प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 22: शाल्ववधोपाख्यानकी समाप्ति और युधिष्ठिरकी आज्ञा लेकर श्रीकृष्ण, धृष्टद्युम्न तथा अन्य सब राजाओंका अपने-अपने नगरको प्रस्थान  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.22.13 
ततो वृष्णिप्रवीरा ये ममासन् सैनिकास्तदा।
ते भयार्ता दिश: सर्वे सहसा विप्रदुद्रुवु:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
यह देखकर मेरे सैनिक, वृष्णिवंश के श्रेष्ठ योद्धा, भय से भरकर सहसा सब दिशाओं में भाग गये।
 
Seeing this, my soldiers, the best warriors of the Vrishni clan, filled with fear, suddenly fled in all directions.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)