श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 219: बृहस्पतिकी संततिका वर्णन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  3.219.5 
प्रथमेनाज्यभागेन पूज्यते योऽग्निरध्वरे।
अग्निस्तस्य भरद्वाज: प्रथम: पुत्र उच्यते॥ ५॥
 
 
अनुवाद
यज्ञ में प्रथम अज्यभाग द्वारा जिस अग्नि की पूजा की जाती है, वह शंयुक के ज्येष्ठ पुत्र ‘भारद्वाज’ नामक अग्नि कही गई है ॥5॥
 
The fire which is worshiped by the first Ajyabhaga in the Yagya is said to be the fire named ‘Bhardwaj’, the eldest son of Shanyuka. 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)