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mahabharat 3.219.4: शन्यूकि की पत्नी का नाम सत्या था। वह धर्म की पुत्री थी। उसके रूप और गुणों की कोई तुलना नहीं थी। वह सदैव सत्य का पालन करने में तत्पर रहती थी। उसके गर्भ से शन्यू को अग्निरूपी एक पुत्र और उत्तम व्रतों का पालन करने वाली तीन पुत्रियाँ उत्पन्न हुईं। 4॥   |   mahabharat अध्याय 3.219: बृहस्पतिकी संततिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 219: बृहस्पतिकी संततिका वर्णन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.219.4 
शंयोरप्रतिमा भार्या सत्या सत्याथ धर्मजा।
अग्निस्तस्य सुतो दीप्तस्तिस्र: कन्याश्च सुव्रता:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
शन्यूकि की पत्नी का नाम सत्या था। वह धर्म की पुत्री थी। उसके रूप और गुणों की कोई तुलना नहीं थी। वह सदैव सत्य का पालन करने में तत्पर रहती थी। उसके गर्भ से शन्यू को अग्निरूपी एक पुत्र और उत्तम व्रतों का पालन करने वाली तीन पुत्रियाँ उत्पन्न हुईं। 4॥
 
Shanyuki's wife's name was Satya. She was the daughter of Dharma. There was no comparison to his looks and qualities. She was always ready to follow the truth. From her womb, Shanyu had a son in the form of fire and three daughters who followed good fasts. 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)