श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 219: बृहस्पतिकी संततिका वर्णन  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  3.219.25 
उक्थो नाम महाभाग त्रिभिरुक्थैरभिष्टुत:।
महावाचं त्वजनयत् समाश्वासं हि यं विदु:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
महाभाग! ब्राह्मण लोग ऊपर वर्णित तीन मन्त्रों से जिसकी स्तुति करते हैं, जिसने महावाणी (परा) का आविष्कार किया है और जिसे बुद्धिमान् पुरुष आश्वासन देने वाला मानते हैं; उस अग्नि का नाम ‘उक्त’ है।
 
Mahabhag! Whom the brahmins praise with the threefold mantras mentioned above, who has invented Mahavaani (Para) and whom wise men consider to give assurance; The name of that fire is ‘Uktha’.
 
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि मार्कण्डेयसमास्यापर्वणि आंगिरसोपाख्याने एकोनविंशत्यधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २१९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत मार्कण्डेयसमास्यापर्वमें आंगिरसोपाख्यानविषयक

दो सौ उन्नीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २१९॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)