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mahabharat 3.219.22: अग्निस्वरूप बृहस्पति जब शान्त प्राणियों पर क्रोधित हुए, तो उनके शरीर से निकला पसीना उनकी पुत्री में परिवर्तित हो गया। वह पुत्री अत्यन्त क्रोधी थी। वह 'स्वाहा' नाम से प्रसिद्ध हुई। वह क्रूर एवं निर्दयी कन्या समस्त प्राणियों में निवास करती है ॥22॥   |   mahabharat अध्याय 3.219: बृहस्पतिकी संततिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 219: बृहस्पतिकी संततिका वर्णन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  3.219.22 
य: प्रशान्तेषु भूतेषु मन्युर्भवति पावक:।
क्रुद्धस्य तु रसो जज्ञे मन्युतीव्रा च पुत्रिका।
स्वाहेति दारुणा क्रूरा सर्वभूतेषु तिष्ठति॥ २२॥
 
 
अनुवाद
अग्निस्वरूप बृहस्पति जब शान्त प्राणियों पर क्रोधित हुए, तो उनके शरीर से निकला पसीना उनकी पुत्री में परिवर्तित हो गया। वह पुत्री अत्यन्त क्रोधी थी। वह 'स्वाहा' नाम से प्रसिद्ध हुई। वह क्रूर एवं निर्दयी कन्या समस्त प्राणियों में निवास करती है ॥22॥
 
When Brihaspati, who was in the form of fire, was furious at the peaceful creatures, the sweat that came out of his body transformed into his daughter. That daughter was very short-tempered. She became famous by the name 'Swaha'. That cruel and ruthless girl resides in all living creatures. ॥22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)