श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 219: बृहस्पतिकी संततिका वर्णन  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  3.219.12 
यस्तु न च्यवते नित्यं यशसा वर्चसा श्रिया।
अग्निर्निश्च्यवनो नाम पृथिवीं स्तौति केवलम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
बृहस्पति के (दूसरे) पुत्र का नाम 'निश्च्यवान' है। ये यश, कीर्ति और वैभव कभी क्षीण नहीं होते। निश्च्यवान अग्नि ही पृथ्वी की स्तुति करते हैं॥
 
The name of Jupiter's (second) son is 'Nishchyavan'. These fame, glory and glory never fade away. Nishchyavan Agni praises only the earth*॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)