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श्री महाभारत
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अध्याय 219: बृहस्पतिकी संततिका वर्णन
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श्लोक 10
श्लोक
3.219.10
हविषा यो द्वितीयेन सोमेन सह युज्यते।
रथप्रभू रथध्वान: कुम्भरेता: स उच्यते॥ १०॥
अनुवाद
सोमदेवता के साथ उन्हें अज्या का दूसरा भाग प्राप्त होता है। उन्हें 'रथप्रभु', 'रथध्वान' और 'कुंभरीत' भी कहा जाता है।॥10॥
Along with Somdevata, he gets the second share of Ajya. He is also called 'Rathprabhu', 'Rathdhwaan' and 'Kumbhreeta'.॥10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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