श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 219: बृहस्पतिकी संततिका वर्णन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.219.1 
मार्कण्डेय उवाच
बृहस्पतेश्चान्द्रमसी भार्याऽऽसीद् या यशस्विनी।
अग्नीन् साजनयत् पुण्यान् षडेकां चापि पुत्रिकाम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
मार्कण्डेयजी कहते हैं- राजन! बृहस्पतिजी की चन्द्रमासी (तारा) नाम से विख्यात पत्नी ने पुत्ररूप में छः पवित्र अग्नियों को तथा एक कन्या को भी जन्म दिया।
 
Markandeyaji says- Rajan! The famous wife of Brihaspatiji, who was famous by the name Chandramasi (Tara), gave birth to six sacred fires in the form of sons and also to a daughter. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)