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mahabharat 3.217.4: कुमार कार्तिकेय का जन्म कैसे हुआ? वे अग्नि के पुत्र कैसे बने? भगवान शंकर, गंगादेवी और कृत्तिकाओं से उनका जन्म कैसे संभव हुआ?॥4॥   |   mahabharat अध्याय 3.217: अग्निका अंगिराको अपना प्रथम पुत्र स्वीकार करना तथा अंगिरासे बृहस्पतिकी उत्पत्ति   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 217: अग्निका अंगिराको अपना प्रथम पुत्र स्वीकार करना तथा अंगिरासे बृहस्पतिकी उत्पत्ति  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.217.4 
कुमारश्च यथोत्पन्नो यथा चाग्ने: सुतोऽभवत्।
यथा रुद्राच्च सम्भूतो गङ्गायां कृत्तिकासु च॥ ४॥
 
 
अनुवाद
कुमार कार्तिकेय का जन्म कैसे हुआ? वे अग्नि के पुत्र कैसे बने? भगवान शंकर, गंगादेवी और कृत्तिकाओं से उनका जन्म कैसे संभव हुआ?॥4॥
 
How was Kumar Kartikeya born? How did he become the son of Agni? How was his birth possible from Lord Shankar and Gangadevi and Krittikas?॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)