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mahabharat 3.217.2: युधिष्ठिर ने पूछा - मुनिवर! पूर्वकाल में अग्निदेव किस कारण से जल में प्रविष्ट हुए थे? और जब अग्नि अदृश्य हो गए, तब महाबली अंगिरा ऋषि किस प्रकार अग्निरूप होकर देवताओं को हवि पहुँचाते थे?॥2॥   |   mahabharat अध्याय 3.217: अग्निका अंगिराको अपना प्रथम पुत्र स्वीकार करना तथा अंगिरासे बृहस्पतिकी उत्पत्ति   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 217: अग्निका अंगिराको अपना प्रथम पुत्र स्वीकार करना तथा अंगिरासे बृहस्पतिकी उत्पत्ति  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.217.2 
युधिष्ठिर उवाच
कथमग्निर्वनं यात: कथं चाप्यङ्गिरा: पुरा।
नष्टेऽग्नौ हव्यमवहदग्निर्भूत्वा महाद्युति:॥ २॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा - मुनिवर! पूर्वकाल में अग्निदेव किस कारण से जल में प्रविष्ट हुए थे? और जब अग्नि अदृश्य हो गए, तब महाबली अंगिरा ऋषि किस प्रकार अग्निरूप होकर देवताओं को हवि पहुँचाते थे?॥2॥
 
Yudhishthira asked - Sage! For what reason did Agnidev enter the water in the past? And when Agni disappeared, how did the mighty sage Angira become Agni and deliver the offerings to the gods?॥2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)