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mahabharat 3.217.19: भरतनन्दन! अंगिरा को अग्निदेव का प्रथम पुत्र जानकर सब देवता उनके पास आए और इसका कारण पूछने लगे॥19॥   |   mahabharat अध्याय 3.217: अग्निका अंगिराको अपना प्रथम पुत्र स्वीकार करना तथा अंगिरासे बृहस्पतिकी उत्पत्ति   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 217: अग्निका अंगिराको अपना प्रथम पुत्र स्वीकार करना तथा अंगिरासे बृहस्पतिकी उत्पत्ति  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  3.217.19 
ज्ञात्वा प्रथमजं तं तु वह्नेराङ्गिरसं सुतम्।
उपेत्य देवा: पप्रच्छु: कारणं तत्र भारत॥ १९॥
 
 
अनुवाद
भरतनन्दन! अंगिरा को अग्निदेव का प्रथम पुत्र जानकर सब देवता उनके पास आए और इसका कारण पूछने लगे॥19॥
 
Bharatanandan! Knowing Angira to be the first son of Agnidev, all the gods came to him and started asking the reason for this.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)