Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.217.18: मार्कण्डेय कहते हैं- हे राजन! अंगिरा के ये वचन सुनकर अग्निदेव ने वैसा ही किया। उन्होंने उसे अपना प्रथम पुत्र स्वीकार किया। तत्पश्चात् अंगिरा के भी बृहस्पति नामक पुत्र हुए॥18॥ | mahabharat अध्याय 3.217: अग्निका अंगिराको अपना प्रथम पुत्र स्वीकार करना तथा अंगिरासे बृहस्पतिकी उत्पत्ति । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मार्कण्डेय कहते हैं- हे राजन! अंगिरा के ये वचन सुनकर अग्निदेव ने वैसा ही किया। उन्होंने उसे अपना प्रथम पुत्र स्वीकार किया। तत्पश्चात् अंगिरा के भी बृहस्पति नामक पुत्र हुए॥18॥
Markandeya says- O King! On hearing these words of Angira, Agnidev did the same. He accepted him as his first son. Then Angira also had a son named Brihaspati.॥ 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥