श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 216: कौशिक-धर्मव्याध-संवादका उपसंहार तथा कौशिकका अपने घरको प्रस्थान  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.216.4 
शूद्रयोन्यां वर्तमानो धर्मज्ञो हि भविष्यसि।
मातापित्रोश्च शुश्रूषां करिष्यसि न संशय:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
तू शूद्र योनि में निवास करेगा, धर्म का पालन करेगा और माता-पिता की सेवा करेगा। इसमें किंचितमात्र भी संदेह की गुंजाइश नहीं है ॥4॥
 
You will live in the yoni of a Shudra and will be a follower of Dharma and will serve your parents. There is no room for even the slightest doubt in this. ॥ 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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