श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 216: कौशिक-धर्मव्याध-संवादका उपसंहार तथा कौशिकका अपने घरको प्रस्थान  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  3.216.36 
युधिष्ठिर उवाच
अत्यद्‍भुतमिदं ब्रह्मन् धर्माख्यानमनुत्तमम्।
सर्वधर्मविदां श्रेष्ठ कथितं मुनिसत्तम॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले - हे ब्रह्मन्! आपने धर्म के विषय में बड़ी ही अद्भुत एवं उत्तम कथा कही है। हे मुनि! आप धर्म को जानने वालों में श्रेष्ठ हैं।
 
Yudhishthira said - O Brahman! You have narrated a very wonderful and excellent story about religion. O sage! You are the best among all those who know religion.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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