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mahabharat 3.216.26: किए हुए कर्मों का फल अवश्य दिखाई देता है। केवल उदास होकर बैठे रहने से कोई अच्छा फल नहीं मिलता॥26॥   |   mahabharat अध्याय 3.216: कौशिक-धर्मव्याध-संवादका उपसंहार तथा कौशिकका अपने घरको प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 216: कौशिक-धर्मव्याध-संवादका उपसंहार तथा कौशिकका अपने घरको प्रस्थान  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  3.216.26 
अवश्यं क्रियमाणस्य कर्मणो दृश्यते फलम्।
न हि निर्वेदमागम्य किंचित् प्राप्नोति शोभनम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
किए हुए कर्मों का फल अवश्य दिखाई देता है। केवल उदास होकर बैठे रहने से कोई अच्छा फल नहीं मिलता॥26॥
 
The results of the deeds performed are certainly visible. Just sitting around dejectedly does not bring any good results.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)