Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.216.21-22: केवल शोक करने से कुछ प्राप्त नहीं होता, केवल दुःख ही प्राप्त होता है। जो ज्ञान से संतुष्ट हैं और सुख-दुःख दोनों का त्याग कर देते हैं, वे ही ज्ञानी पुरुष सुखी होते हैं। मूर्ख लोग असंतुष्ट रहते हैं और ज्ञानी लोग संतोष प्राप्त करते हैं॥ 21-22॥ | mahabharat अध्याय 3.216: कौशिक-धर्मव्याध-संवादका उपसंहार तथा कौशिकका अपने घरको प्रस्थान । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शोचतो न भवेत् किंचित् केवलं परितप्यते।
परित्यजन्ति ये दु:खं सुखं वाप्युभयं नरा:॥ २१॥
त एव सुखमेधन्ते ज्ञानतृप्ता मनीषिण:।
असंतोषपरा मूढा: संतोषं यान्ति पण्डिता:॥ २२॥
अनुवाद
केवल शोक करने से कुछ प्राप्त नहीं होता, केवल दुःख ही प्राप्त होता है। जो ज्ञान से संतुष्ट हैं और सुख-दुःख दोनों का त्याग कर देते हैं, वे ही ज्ञानी पुरुष सुखी होते हैं। मूर्ख लोग असंतुष्ट रहते हैं और ज्ञानी लोग संतोष प्राप्त करते हैं॥ 21-22॥
Nothing is achieved by just mourning, one only gets sorrow. Only those wise men who are satisfied with knowledge and abandon both happiness and sorrow are happy. Foolish people are dissatisfied and the wise get satisfaction.॥ 21-22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥