श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 216: कौशिक-धर्मव्याध-संवादका उपसंहार तथा कौशिकका अपने घरको प्रस्थान  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  3.216.19 
गुणैर्भूतानि युज्यन्ते वियुज्यन्ते तथैव च।
सर्वाणि नैतदेकस्य शोकस्थानं हि विद्यते॥ १९॥
 
 
अनुवाद
जैसे सभी प्राणी तीनों गुणों के फलस्वरूप नाना प्रकार के पदार्थों आदि से युक्त होते हैं, वैसे ही वे वियोग भी प्राप्त करते हैं। अतः एक वस्तु का संयोग और दूसरी वस्तु का वियोग वास्तव में दुःख का कारण नहीं है॥19॥
 
Just as all beings unite with various objects etc. which are the result of the three Gunas, they also get separated in the same manner. Therefore, the union with one thing and the separation from another is not really the cause of grief.॥ 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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