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मेरी बात सुनकर ऋषि क्रोधित हो गए और बोले, 'निर्दयी ब्राह्मण! तू शूद्र योनि में जन्म लेगा और शिकारी बनेगा।'
On hearing my words the sage became furious and replied, 'Merciless Brahmin! You will be born as a Shudra and will be a hunter.'
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि मार्कण्डेयसमास्यापर्वणि ब्राह्मणव्याधसंवादे पञ्चदशाधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २१५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत मार्कण्डेयसमास्यापर्वमें ब्राह्मण-व्याधसंवादविषयक
दो सौ पंद्रहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २१५॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥